बच्चों में होने वाले कब्ज को दूर करने के कुछ आसान घरेलू इलाज

कब्ज

शिशुओं में कब्ज एक सामान्य एवं प्रमुख समस्या है। एक माता-पिता होने के नाते अपने बच्चों को कब्ज से होने वाली पीड़ा से परेशान होते देखना काफी कष्टकारक होता है।

बच्चों में कब्ज होना एक बहुत सामान्य बात है इसमें चिंचित होने की बात नहीं है, लेकिन लम्बे समय तक अनियमित मल निकलना अन्य बीमारियों का संकेत भी हो सकता है। साथ ही लंबे समय तक गंभीर कब्ज, अन्य बीमारियों का कारण बन सकता है।

  • बच्चों में कब्ज के निम्नलिखित सामान्य कारण हैं:
  • पानी या तरल पदार्थ का उपयोग कम करना
  • कठोर खाद्य पदार्थ का उपयोग
  • आहार में लगातार परिवर्तन
  • गाय का दूध उपयोग में लाना
  • पारिवारिक पृष्ठभूमि
  • दवाईयाँ

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आप निम्नलिखित लक्षणों को देखकर अपने बच्चों की कब्ज की स्थिति की पहचान कर सकते हैं:

  • शिशु द्वारा कठोर मल का त्याग (मल किस तरह का होता है, कब्ज को हम इससे भी पहचान सकते हैं न कि सिर्फ इसके आवृत्ति से)
  • मल के साथ खून का आना (मल में खून का आना इस बात की ओर संकेत करता है कि बच्चा मल निकालने के लिए बहुत अधिक दबाव डाल रहा है। कठोर मल को निकालने से गुदा द्वार के चारों ओर कट जाता हैं जिसकी वजह से  मल में खून आ सकता है)
  • शिशु के पेट का मुलायम नहीं होना (कब्ज से होने वाली सूजन और दबाव बच्चे के पेट को कठोर बनाता है और पेट भरा जैसा महसूस होता है)
  • शिशु का उसके पसंदीदा खाद्य पदार्थ को खाने से भी इनकार करना (अगर शिशु को कब्ज हो जाता है तो उनको पूरी तरह से पेट भरा महसूस होता है)

एक चीज़ जिसे हम सभी अपने अनुभव से जानते है कि- आहार को विनियमित करना ज़्यादातर शारीरिक समस्याओं को ठीक करने में सबसे प्रभावशाली कारक है और कब्ज इससे अलग नहीं है। हमें पता होता कि हमारी बच्ची क्या खा रही है और वह कैसे खा रही है; इसका विश्लेषण किया जाना चाहिए।

निम्नलिखित कुछ महत्वपूर्ण उपाय प्रयोग में लाया जा सकता है :

पानी : जन्म से लेके 6 महीने तक शिशु को तरल देने का एक मात्र उपाय है – स्तनपान या फॉर्मूला दूध। लेकिन 6 महीने बाद, जब उनके रोज़ाना आहार में कुछ सेमि सॉलिड (थोड़े ठोस) खाद्य पदार्थों को दिया जाता है परिणामस्वरूप दूध काम पीने के साथ उनका तरल सेवन भी कम हो जाता है। इसलिए, शिशु को पानी पिलाने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। एक सामान्य आँकड़ा के मुताबिक 1 साल के बच्चे को रस, पानी और सूप के रूप में कम से कम 960 मिलीलीटर तरल प्रति दिन दिया जाना चाहिए। धीरे-धीरे बच्चों को ठोस भोजन खिलाने के साथ पानी भी अधिक पिलाना चाहिए, लेकिन ज़्यादा पानी बच्चों की अपरिपक्व किडनी पर अतिरिक्त दबाव भी डाल सकता है। इसलिए, पानी के साथ चीनी और नमक घोलकर पिलाने से संतुलन बनाना आवश्यक है।

आलूबुखारा या सूखे बेर: 6 महीने से 1 साल तक के शिशुओं के लिए आलूबुखारा या सूखे बेर का रस अच्छा होता है। इसमें सोर्बिटोल (चीनी वाला अल्कोहल) होता है जो एक प्राकृतिक लैक्सेटिव (घुट्टी) की तरह काम करता है, जिसे रस या प्यूरी के रूप में लिया जा सकता है। इसे तैयार करने के लिए, थोड़े पानी में आलूबुखारा या सूखे बेर को घोलकर फिर रस को छान लें, बच्चे के स्वाद को बनाने के लिए थोड़ी सी चीनी डाल सकते हैं। 1 साल तक के बच्चे को 30 से 60 मिलीलीटर तक ये रस दिया जा सकता है। इस रस को ज़्यादा पिलाने से दस्त हो सकता है अतः गंभीर कब्ज की स्थिति में इसका प्रयोग इस तरह किया जा सकता है। आलूबुखारा या सूखे बेर का रस न सिर्फ एक प्राकृतिक लक्सेटिव हैं, बल्कि इनमें अन्य आवश्यक विटामिन और मिनरल्स भी शामिल हैं जो बच्चों के पूरे स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है।

किशमिश : किशमिश पोटेशियम, कैल्शियम, आयरन और मैग्नीशियम से युक्त सघन आहार फाइबर का स्रोत है। इसमें मौजूद आहार फाइबर कब्ज को ठीक करने में बहुत सहायक है और इसे बच्चों को पानी में उबालकर और प्यूरी के रूप में दिया जा सकता है। इस प्यूरी को अन्य खाद्य पदार्थों जैसे ओट्स या खोई में भी बच्चों के लिए दलिया के रूप में दिया जा सकता है लेकिन सात महीने पूरे होने के बाद ही बच्चों के लिए किशमिश का उपयोग किया जाना चाहिए।

खजूर : खजूर में पर्याप्त मात्रा में आहार फाइबर पाए जाने के कारन इसका प्रयोग एक प्राकृतिक लैक्सटिव के रूप में कब्ज से पीड़ित बच्चों के लिए किया जाता है। इसके कारण शिशु को मल परित्याग में आसानी होती है साथ ही इसमें मौजूद आयरन और मैग्नीशियम बच्चों के शारीरिक विकास में भी सहायक होता है।

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आहार को विनियमित करने के अलावा कुछ पुराने घरेलु उपचार भी हैं जिसे करने से अच्छे लाभ मिलते हैं :

  • नारियल के तेल से शिशु के  पेट की घड़ी की दिशा में और विपरीत दिशा में दोनों तरफ (क्लॉकवाईस और एंटी क्लॉकवाईस) हल्के हाथ मालिश करनी चाहिए।
  • शिशु के पैरों को धीरे-धीरे साइकिल चलाने की गति में घुमानी चाहिए जिसे प्रायः शिशु पसंद भी करते हैं ।
  • शिशु को गर्म स्नान देने के लिए उसके बाथटब में थोड़ा गर्म पानी और बेटाडीन डाल कर उसे स्नान कराना चाहिए।

हम एक साल के बच्चों के लिए आहार योजना (डाइट प्लान) का एक नमूना प्रस्तुत करते हैं: 

  • सुबह 8.00 बजे: खाली पेट आलूबुखारा या सूखे बेर का रस (120 मिलीलीटर)
  • सुबह 9.30 बजे: किशमिश और खजूर के साथ ओट्स
  • सुबह 11.00 बजे: मां का दूध / फार्मूला दूध
  • दोपहर 12.30 बजे: सब्जी (पत्तेदार) और मछली के साथ चावल
  • दोपहर 2.30 बजे: मां का दूध / फार्मूला दूध
  • शाम 5.00 बजे: खोई + सत्तू (घर का बना) + दूध
  • शाम 7.00 बजे: मां का दूध / फार्मूला दूध
  • रात 8.30 बजे: सब्जियों से बनी दलिया खिचड़ी
  • रात 10.00 बजे: मां का दूध / फार्मूला दूध